शनिवार, 27 अक्टूबर 2018

अपने talent को कैसे पहचानें।

  • बहुत से ऐसे लोग है जो हमेशा जो  ये सोचते रहते है कि यार मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ मेरे में talent  नही है और जो टैलेंट होते है वो गॉड गिफ्टेड होते है। मैं कुछ नही कर सकता हूँ मेरा जीवन बर्बाद है मैं बेकार हु मैं किसी के काम नही आ सकता। मैं अपने लिए कुछ नही कर सकता, और न जाने क्या क्या। आज हम बात करेंगे इसी टॉपिक पर आखिर उनमे कमी कहा रह जाती है ,                                                                                                                                                   Achhisoch2.blogspot.com                                                                                                                                                                                                    आइये एक story के द्वारा समझते है -.            एक आदमी रास्ते से गुजर रहा था कि तभी उसने देखा कि एक हाथी एक लकड़ी के छोटे के खूंटे से बंधा हुआ था। आदमी को बड़ी हैरानी हुई कि बिशाल हाथी एक पतली सी रस्सी के सहारे एक खूटे से बंधा हुआ है।                                                                         ये देखकर आदमी को आश्चर्य भी हुआ और हंसी भी आई। उस आदमी ने हाथी के मालिक से कहा इतना विशाल हाथी है कि चाहे तो एक झटके में तोड़ सकता है ,फिर भी खूंटे से बंधा हुआ है।                                                                           हाथी के मालिक ने उस आदमी से कहा - जब ये छोटा था तब ही इसे  रस्सी से बंधा  था। तब इसने खुटा उखाड़ने की बहुत कोशिश की ये छोटा था इसलिए ये नाकाम रहा । इसने हजारो कोशिश की लेकिन नाकाम रहा तो इसे biswas हो गया कि रस्सी बहुत ही मजबूत है मैं इसे कभी तोड़ नही तोड़ पाउँगा इस तरह से इसने रस्सी तोड़ने की कोशिश ही छोड़ दी।।                                                                          ये हाथी इतना विशाल होने के बावजूद भी रस्सी नही तोड़ रहा । क्योंकि इसके  मन में आज भी बिस्वास है कि वो रस्सी को नही तोड़ सकता है।।                                                                                                                  Achhisoch2.blogspot.com                                                                                                                                          मैं इस कहानी से बतलाना चाहता हु की कमी है self confidence ki और बहाना बनाने की अरे ये उससे नही हुआ तो मुझसे क्या होगा वो पढ़ने में इतना तेज था उससे नही हुआ तो मुझसे क्या होगा वो इतना टैलेंट था भाई जब उससे नही हुआ तो सवाल ही नही पैदा होता मुझसे हो जाएगा । कोशिश ना करना सबसे बड़ी बजह है।       Always positive सोचे क्योंकि जैसा आप सोचते वैसा आप बन जाते है।।                                                                      और इसी तरह पोस्ट पढ़ने के लिए हमारे लिंक पर जाए।   Achhisoch2.blogspot.com

बुधवार, 24 अक्टूबर 2018

Motivational quotes for student in hindi

मैंने बाल्मीकि की कहानी पढ़ी।  इसमे मैं एक बात कह सकता हूँ कि कुछ इंसान को एक रास्ता दिखा दो जो उस टाइम अच्छा लगे और वो उस रास्ता पर चलने लगता है जैसे कि रत्नाकर डाकू महर्षि नारद जी के कहने पर , उनके दिखाए रास्ते पर चल कर बाल्मीकि जैसा महान संत बन जाता है। तो फिर हम क्यू नही महान बन सकते है।
              

 लेकिन कुछ लोग को बार बार motivate करना पड़ता

है और जिस इंसान को बार बार motivate करना पड़े वो motivation स्टोरी के अनुसार अपना अलग अलग dream बनाता है और कुछ नही कर पाता है, जबकि उसके पास बहुत knowledge होती है फिर भी कुछ नही कर पाता है।                        Achhisoch2.blogspot.com                                                                                                      इतिहास  rachne वाले को एक हिंट मिल जाए तो  वो कुछ कर ही देता है और अपना नाम famous करके उजागर कर देता है, परंतु आज के जमाने मे 10 year  या फिर 12 year के बच्चे को motivation की जरूरत होती है ताकि वो अपना future secure कर सके ।
                          
जब वह 10th pass करे तो उसे समझ मे आ जाना चाहिए कि उसे आगे क्या करना है।जब वह 10th pass करेगा तो उसका age लगभग 15 year के आसपास होगी। 10 year or 15 year का जो difference है इतने में वह समझ जाएगा कि उसे क्या करना है,

          
लेकिन जब आप 15 year के हो जाने बाद motivation video देखना start करते है तो उस समय already 12th ki preparation start हो जाती है औऱ 12th में पढ़ाई का इतना pressure रहता है
                             
कि हर समय पढ़ाई पर ध्यान लगाना पड़ता है खासकर जो बच्चे iit ki preparation कर रहे है। जो बच्चे सिर्फ बोर्ड की तैयारी करते है उनके लिए तो ठीक है। अंतत: जब exam हो  जाता है जो बोर्ड की तैयारी कर रहे है उनका तो ठीक है । वो पहले से तय करके रखा है हमे इंजीनियरिंग नही करनी है। वो सीधा सरकारी job की तैयारी करने लगते है, परंतु जो iit  वाले होते है वो जिनका iit ya nit ho  गया उनका तो ठीक है.                    
                     
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 But, जिनका iit ya nit नही हुआ वो सोच में पड़ जाते है कि वो क्या करे अंत मे आता है इंजीनियरिंग करनी है।किसी एक अच्छा  college देखकर admission ले लेते है। College  जाने के बाद उनको पता चलता है कि जो सुना था पैकेज सब बकवास था सिर्फ topper का जाता है अच्छा package। फिर भी placement तो हो ही जाता है पर कम्पनी कुत्ते की तरह काम करवाती है तो पर चलता है इस से अच्छा तो सरकारी जॉब थ। फिर सरकारी जॉब कि तैयारी करने लगते है। अगर 4 year के अंदर जॉब हो गयी तो फिर अच्छा है पर अगर नही हुई, तो उम्र का भी pressure हो जाता है और उसे motivation की जरूरत पड़ती है। इसलिये मैं आपसे यह कहना चाहता हु की जो फैसला ले सोच समझ कर ले।
                             
समय कीमती है उसे uhi waste न जाने दे। ये मेरी अपनी राय है ।                                                                             Achhisoch2.blogspot.com                                                                            अगर आप हमें पोस्ट से जुड़ी सलाह देना चाहते है तो हमे कमेंट में जरूर बताएं। आप हमें ईमेल भी कर सकते है।             manishssm512000@gmail.com

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018

महर्षि बाल्मिकी: आखिर एक डाकू कैसे बना इतना बड़ा संत।

रत्नाकर से बने महर्षि वाल्मीकि...
धर्म ग्रंथों के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि का पूर्व नाम रत्नाकर था। ये अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए लूट-पाट करते थे। एक बार उन्हें निर्जन वन में नारद मुनि मिले।
                    
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जब रत्नाकर ने उन्हें लूटना चाहा, तो उन्होंने रत्नाकर से पूछा कि- यह काम तुम किसलिए करते हो? तब रत्नाकर ने जवाब दिया कि- अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए।  नारद ने प्रश्न किया कि- इस काम के फलस्वरूप जो पाप तुम्हें होगा, क्या उसका दंड भुगतने में तुम्हारे परिवार वाले तुम्हारा साथ देंगे? नारद मुनि के प्रश्न का जवाब जानने के लिए रत्नाकर अपने घर गए।  परिवार वालों से पूछा कि- मेरे द्वारा किए गए काम के फलस्वरूप मिलने वाले पाप के दंड में क्या तुम मेरा साथ दोगे? रत्नाकर की बात सुनकर सभी ने मना कर दिया।  रत्नाकर ने वापस आकर यह बात नारद मुनि को बताई।
                         
तब नारद मुनि ने कहा कि- जिन लोगों के लिए तुम बुरे काम करते हो यदि वे ही तुम्हारे पाप में भागीदार नहीं बनना चाहते तो फिर क्यों तुम यह पापकर्म करते हो? नारद मुनि की बात सुनकर इनके मन में वैराग्य का भाव आ गया। अपने उद्धार के उपाय पूछने पर नारद मुनि ने इन्हें राम नाम का जाप करने के लिए कहा। रत्नाकर वन में एकांत स्थान पर बैठकर राम-राम जपने लगे।  कई सालों तक कठोर तप के बाद उनके पूरे शरीर पर चींटियों ने बाँबी बना ली, इसी वजह से इनका नाम वाल्मीकि पड़ा। कालांतर में महर्षि वाल्मीकि ने रामायण महाकाव्य की रचना की।  

                                                     आज मैं उन सभी लोगो से कहना चाहता हु, जो लोग अपने जीवन मे नीराश है।।     हो sakta है आज  aapka  Life रात्नाकर डाकू वाला हो और आने वालेा कल बाल्मीकी sant ऐसा हो । बस आप धौैर्य बनाये rakhiye,और अपना karm करते रहीये ।।                                                                    hamesha yaad    rakhe  ki achhe ke sath hamesha achha hota hai .

Motivational story for employees in hindi

अगर हम जीवन में सफल होना चाहते है (सफल होना मतलब खुश रहना संतुष्ट रहना , जीवन का पूरा आनंद लेना न की सिर्फ पैसे कामना ) तो वही करे जो हमें पसंद हो . आपने कई लोगो के बारे में सुना होगा जिनका लोगो ने पहले बहुत मज़ाक उड़ाया. पर आज सब उन्ही की तरह बनना चाहते है . जैसे सचिन तेंदुलकर , लता मंगेशकर , संदीप माहेश्वरी , आदि आदि अगर उनके पेरेंट्स भी उन्हें किसी और फील्ड में जाने के लिए वाद्य करते है।                                                           Achhisoch2.blogspot.com

जीने के दो ही तरीके हैं, पहला यह कि कुछ भी चमत्कार नहीं है और दूसरा यह कि सब कुछ चमत्कार ही है.
1.जब तुम प्रकृति को गौर से देखोगे तब कुछ भी बेहतर तरीके से समझ सकते हो।
2.किसी एक चीज को बार-बार करना और हर बार अलग परिणाम की आशा करना मूर्खता है।

3.सबसे पहले आपको खेल के नियमों को जानना चाहिए, उसके बाद ही आप दूसरों से बेहतर खेल सकते हैं।कल से सीखें और आज के लिए जिएं. सफल होना चाहते हैं तो जीवन में सवाल करने की आदत को कभी भी न छोड़ें।
4. हम अपनी समस्याओं को उन विचारों के साथ नहीं सुलझा सकते, जिनसे वे उपजे हों।


5. तेज होने की पहचान ज्यादा ज्ञानवान होना नहीं है बल्कि इसका मतलब कल्पना और सपने देखने की ताकत है।
6. सफलता का सबसे बड़ा स्रोत अनुभव है। # lord Shree
Krishna ne Geeta me kha tha

 जो अपनी सीमाओं को जानता है, वहीं उससे आगे जाता है.
8. तर्क आपको A से B तक ले जाएगा जबकि कल्पना के सहारे आप कहीं भी जा सकते हैं।                                                                         

"ध्रुव" तारा की story .

ये कहानी सिर्फ ध्रुव की तारा बनने तक ही सीमित नही है, बल्कि ये कहानी एक नन्हे बालक की दृढता, निर्भयता कठोर तपस्या की है।                                         




                         Achhisoch2.blogspot.com                                                                                                                            राजा उतनापाद की दो रानियाँ थी। प्रिय रानी का नाम था सुरुचि और अप्रिय रानी का नाम था सुनीति। दोनो रानियो को एक-एक पुत्र थे। एक दिन सुनीति का ध्रुव खेलता खेलता अपने पिता की गोद मे बैठ गया। प्रिय रानी ने तुरंत ही उसे गोद से नीचे उतारकर कहा:  






                                               "पिता की गोद में बैठने के लिए पहले मेरी कोख से जन्म ले।" ध्रुव रोता-रोता अपनी माँ के पास गया और सब बाते म से कही। माँ ने ध्रुव को समझाया :" बेटा! यह राजगदी तो नशवर है परंतु तू तो भगवान का दर्शन करके शाश्वत गददी प्राप्त कर।" ध्रुव को माँ की सीख बहुत अच्छी लगी और तुरंत ही दृढ़ निश्चय करके तप करने के लिए जंगल में चल गया। रास्ते मे हिन्सक पशु भी मिले फिर भी वह भयभीत नही हुआ। इतने में उसेे देवर्षि नाराद जी मिले। वो ध्रुव को भगवान की भक्ति की विधि बताते हैं जिसे जानने के बाद ध्रुव कठोर तपस्या में लीन हो जाता हैं |

कई महीनो तक खड़े होकर तपस्या करता हैं | कभी जल में तपस्या करता हैं तो कभी एक ऊँगली पर खड़े रहकर | निरंतर ॐ नमो वासुदेवाय का जाप पुरे ब्रह्माण में गूंजने लगता हैं | नन्हे से बालक की इस घौर तपस्या को देख भगवान् उसे दर्शन देते हैं |

बालक ध्रुव भाव विभौर हो उठता हैं और कहता हैं मुझे माता, पिता की गोद में बैठने नहीं देती | मेरी माँ कहती हैं कि आप इस श्रृष्टि के पिता हैं | अतः मुझे आपकी गोद में बैठना हैं | भगवान उसकी इच्छा पूरी करते हैं और उसे तारा बनने का आशीर्वाद देते हैं जो कि सप्त ऋषियों से भी ज्यादा श्रेष्ठ होगा | उस दिन से आज तक आसमान में उत्तर दिशा की और ध्रुव तारा चमक रहा हैं |Achhisoch2.blogspot.com